Schemes of Department

सचिवालय में प्रवेश हेतु पहचान-पत्र

सचिवालय में प्रवेश हेतु प्रवेश-पत्र चार प्रकार के होते हैं

1) सचिवालय के अधिकारियों के लिये पहचान पत्र
2) सचिवालय सम्वर्ग के कर्मचारियों के लिये पहचान-पत्र
3) अस्थाई प्रवेश-पत्र
4) दैनिक प्रवेश-पत्र

1) सचिवालय के अधिकारियों के लिये पहचान पत्र :-
इनके लिये स्थाई पहचान-पत्र निर्गत किये जाते हैं, जिसके लिये एक विहित प्रपत्र है, जिसे विभागीय पदाधिकारियों द्वारा अग्रसारित होना चाहिये ।

2) सचिवालय सम्वर्ग के कर्मचारियों के लिये पहचान-पत्र :-

इनके लिये स्थाई पहचान-पत्र निर्गत किये जाते हैं, जिसके लिये एक विहित प्रपत्र है, जिसे विभागीय पदाधिकारियों द्वारा अग्रसारित होना चाहिये ।

3) अस्थाई प्रवेश-पत्र

यह दो प्रकार के होटल हैं :-

a) क्रास पास :-

यह पास वैसे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को जारी किये जाते हैं, जो सचिवालय सम्वर्ग के नहीं होते हैं, परंतु या तो उनका कार्यालय बिहार सचिवालय के परिसर् में है या उन्हें पटना सचिवालय में प्राय: आना पड़ता है और उनका कार्य सचिवालय के सभी भवनों में स्थित पदाधिकारियों/विभागों में पड़ता है एवं यह सूचना पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होता हैं । इसके लिये विहित प्रपत्र में अंकित सूचना उचित माध्यम से भेजना होता है ।

गैर सरकारी व्यक्तियों को एवं अन्य आपूर्तिकर्ता/ठेकेदारों आदि को निर्धारित प्रपत्र में सूचना उचित माध्यम से आने पर यदि आवश्यकता समझा जायेगा तो क्रास-पास भी जारी किये जा सकते हैं । इसके लिये निर्धारित शुल्क 10/- रूपया कोषागार में निर्धारित शीर्ष में जमा करना होगा ।

b) कार्ड-पास :-

यह पास पदस्थापन की प्रतीक्षारत पदाधिकारी/दैनिक मजदूरों को आवश्यकतानुसार स्वीकृत किये जा सकते हैं । यह पास किसी विशेष भवन में प्रवेश के लिये मान्य होते हैं तथा ये सूचना पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होते हैं । इसकी अवधि चार महीनें के लिये होती है ।

4) दैनिक प्रवेश-पत्र :-

यह प्रवेश-पत्र किसी विशेष भवन/विभाग में किसी विशेष कार्य हेतु जानें के लिये मिलता है । यह प्रति दिन जारी किया जाता है । यह 3:00 बजे अपराह्ण के बाद सम्बन्धित विभाग के सचिवालय के आतिथ्य कार्यालय में बनता है ।

पहचान-पत्र अहस्तांतरणीय है । किसी दूसरे व्यक्ति के परिचय-पत्र/प्रवेश-पत्र के उपयोग करनें वाले कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक या अन्य कानूनी कार्यवाही की जायेगी ।

पहचान-पत्र खो जाने पर इसकी सूचना तुरंत पुलिस थानें एवं सूचना पदाधिकअरियों को देनी चाहिये ।

पहचान-पत्र/प्रवेश-पत्र का वापस करना

सेवानिवृत्त होने पर/सेवा से निकाले जानें पर/स्थानांतरण होनें पर/निलम्बित होनें पर/सचिवालय से बाहर प्रतिनियुक्त होनें पर पहचान-पत्र/प्रवेश-पत्र वापस करना अनिवार्य है ।

नोट- सेवानिवृत्त्त एवं निलम्बन की स्थिति में अलग से 6 माह तक के लिये विशेष परिस्थिति में पास सूचना आने पर जारी किया जा सकता है ।

जे0 पी0 सेनानी सम्मान योजना

दिनांक 18-03-1974 से दिनांक 21-03-1977 तक की अवधि में प्रजातंत्र के अस्तित्व की रक्षा के लिये जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलाये गये आन्दोलन में भाग लेनें वाले वैसे व्यक्तियों को जो उक्त अवधि में डी0आई0आर0 या मीसा के तहत एक से छ: महीने तक या छ: महीने से ज्यादा जेल में व्यतित किये हों को क्रमश: 2500/-रू0 एवं 5000/-रू0 मासिक समान पेंशन एवं संदर्भगत अवधि में इस कोटी में जेल में मृत अथवा पुलिस फायरिंग में मारे गये व्यक्तियों के पति/पत्नी को 5000/- रू0 मासिक सम्मान पेंशन तथा पुलिस फायरिंग में गोली से घायल व्यक्तियों को 2500/- (दो हजार पांच सौ) रू0 मासिक सम्मान पेंशन दिया जाता है । इसके लिये आवेदक को जेल का प्रमाण पत्र विभाग में जमा करना होता है, एवं प्रत्येक वर्ष उनको जीवीत प्रमाण-पत्र बैंक (ज़िस बैंक में आवेदक का खाता है) के माध्यम से उपलब्ध करना अनिवार्य है ।

उक्त सम्मान पेंशन प्राप्त करनें के लिये आवेदन पत्र जमा करनें की अंतिम तिथि 31-12-2007 निर्धारित थी ।

माह अगस्त, 2013 तक कुल 2013 सेनानियों को जे0 पी0 सेनानी सम्मान सम्मान पेंशन दिया जा चुका है ।

विस्तृत जानकारी हेतु जे0 पी0 सेनानी सम्मान योजना के वेबसाईट (www.biharonline.gov.in/jp ) का अवलोकन किया जा सकता है ।

अनुग्रह अनुदान

आतंकवाद/उग्रवाद/सम्प्रदायिक/ जातीय विरोधाभाव/ निर्वाचन हिंसा/सामूहिक हिंसा/निर्वाचन संबंधी हिंसा/बिहार सरकार के किसी कार्यालय में हिंसा की घटनाओं में आम नागरिकों की मृत्यु/घायल होनें वाले को अनुग्रह अनुदान दिया जाता है एवं मृत व्यस्क/अवयस्कों के माता-पिता अथवा अभिभावक को अनुग्रह अनुदान दिये जाने का प्रावधान है ।

इस योजनांतर्गत :-

मृत - 1,00,000/- रू0
लापता (जिन्हें मृत मान लिया गया हो) – 1,00,000/- रू0
अपंग – 50,000/- रू0
गंभीर घायल – 20,000/- रू0

देनें का प्रावधान है, जिसकी जिला पदाधिकारी के समीक्षोपरांत अनुशंसा पर विभाग के द्वारा आवंटन की जाती है ।

आतंकवादी/उग्रवादी/साम्प्रदायिक/जातीय/उग्र भीड़ द्वारा सामूहिक रूप से हमला किये जानें के क्रम में भवनों/मकानों(आवासीय/व्यापार परिसर्/अन्य कामगार स्थान) के क्षतिग्रस्त होनें पर निम्न रूप से मकान/भवन/परिसर मालिक को अनुग्रह अनुदान देय होगा -

1) पूर्ण रूप से नष्ट/ध्वस्त होनें पर :-
शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के लिये- पक्का मकान - अधिकतम 1,00,000/- रू0 तक
कच्चा मकान- अधिकतम 50,000/- रू0 तक

2) गंभीर क्षति होनें पर :-
शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के लिये - अधिकतम 30,000/- रू0 तक

3) मामूली क्षति होनें पर :-
मामूली क्षति होनें पर - अधिकतम 5,000/- रू0 तक

जिस भवन का बीमा हुआ हो और उसे बीमा कम्पनी से क्षतिपूर्ति मिलने वाली हो या जो भवन लोक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया हो, उसके लिये यह अनुदान देय नहीं होगा ।

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है:- परिपत्र

कब्रिस्तान की घेराबन्दी

कब्रिस्तान की भूमि का अतिक्रमन एवं इसके चलते साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा सभी कब्रिस्तानों की घेराबंदी पक्की दिवारों या कंटिले तारों से कराने का निर्णय लिया गया है ।

यह योजना पहले अल्प संख्यक विभाग के अंतर्गत था जिसे वर्ष 2007 से गृह विभाग के अंतर्गत ले लिया गया ।

राज्य में कुल 8064 कब्रिस्तान चिन्हित हैं, एवं माह अगस्त, 2013 तक कुल 5860 कब्रिस्तान घेराबन्दी के लिये लिये गये एवं 4396 कब्रिस्तानों के घेराबन्दी का कार्य पूर्ण हो चुका है ।

स्थल चयन एवं घेराबंदी का प्रकार् का चयन जिलापदाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा ।

इसके अंतर्गत एक कब्रिस्तान की घेराबन्दी पर 20,000,00/- रू0 जिला पदाधीकारी अपने स्तर से एवं इससे अधिक की राशि गृह विभाग की अनुशंसा से आवंटित कर सकते हैं, जिसका मासिक प्रगति प्रतिवेदन जिला पदाधिकारी द्वारा विभाग को उपलब्ध कराया जाता है ।

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है:- परिपत्र

अपराधियों का प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास

अपराधियों की उत्पत्ति के स्त्रोत को रोकनें और दीर्घकालिक रूप से अपराध की ओर गरीबों का झुकाव कम कर अपराधियों को अपराध से विमुख करनें और उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्रिय मुख्य धारा से जोड़्नें हेतु सरकार द्वारा दुर्दांत अपराधियों के प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास की योजना कार्यांवित करनें का निर्णय लिया गया जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पन करनें वाले अपराधियों एवं उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो सके और उनका सर्वांगीण विकास हो सके ।

पात्रता एवं प्रक्रिया-

1). यह योजना दुर्दांत अपराधियों जिनका आपराधिक इतिहास रहा है तथा वे आग्नेयास्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करते हैं ।

2). जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक एवं अपराध अनुसंधान विभाग के प्रतिनिधि की स्क्रीनिंग समिति निर्णय लेगी कि आत्मसमर्पण किन्हीं अन्य कारणों से प्रेरित या प्रायोजित नहीं है ।

3). इस योजना का लाभ पुराने निष्क्रिय अपराधकर्मी को न देकर वर्तमान में सक्रिय अपराधियों को ही दिया जायेगा ।

पुनर्वास योजना एवं अन्य लाभ-

1) प्रत्यर्पण करने वाले अपराधी को तात्कालिक सहायता के रूप में 10,000/- रू0 दिये जायेंगे तथा पुनर्वास योजना की स्वीकृति होनें तक प्रतिमाह 3,000/- रू0 की सहायता दी जायेगी ।
2) तात्कालिक आर्थिक सहायता, पुनर्वास योजना की राशि, अपराधी की गिरफ्तारी हेतु सरकार द्वारा घोषित पुरस्कार-राशि अपराधी एवं उसके द्वारा नामित आश्रित , यदि कोई हो तो के संयुक्त नाम से निकट के राष्ट्रिय बैंक/बिहार राज्य सहकारी बैंक या पोस्ट आफिस में जमा की जायेगी , जिससे प्रतिमाह 3,000/- रू0 से अधिक राशि की निकासी नहीं की जा सकेगी ।
3) पुनर्वास योजना की अधिकतम राशि 2,00,000/- रू0 होगी जिसका 25 प्रतिशत अनुदान एवं 75 प्रतिशत ऋण् स्वरूप होगा ।
4) स्वरोजगार हेतु प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा तय की गयी अधिकतम राशि के सम्तूल्य राशि और/या कृषि योग्य भूमि, सिंचाई के साधन ।
5) इंदिरा आवास की पात्रता रखने वाले को इंदिरा आवास, पात्रता नहीं होने की स्थिति में, इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत अनुमान्य राशि के समान अनुदान राशि सम्मिलित करते हुये बैंको के सहयोग से ऋण स्वीकृत करा कर आवास उपलब्ध कराना ।
6) प्रत्यर्पित अपराधी के विरूद्ध दायर फौजदारी मुकदमा में बचाव के लिये सरकार की ओर से नि:शुल्क वकील की व्यवस्था ।

प्रत्यर्पित हथियारों/विस्फोटकों के लिये प्रोत्साहन-

1) राकेट लांचर - 25,000/- रू0
2) एके-47/56/74 - 15,000/- रू0
3) 303 राईफल/पिस्टल/रिवाल्वर - 3,000/- रू0
4) विस्फोटक सामग्री - 1,000/- रू0 (प्रति किलो)

इस योजना के कार्यांवयन की समीक्षा जिला स्तर पर प्रत्येक माह जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित पुनर्वास समिति ( जिसके सदस्य आरक्षी अधीक्षक, उप विकास आयुक्त), प्रमण्डल स्तर पर पत्येक तीन माह पर् प्रमण्डलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति, जिसमें क्षेत्रीय आरक्षी उप- महानिरीक्षक सदस्य होंगे, की समीक्षात्मक टिप्पणियां राज्य सरकार को भेजी जायेंगी । राज्य स्तर पर इसकी समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक छ: माह पर की जायेगी, जिसमें विकास आयुक्त, वित्त आयुक्त, गृह आयुक्त, विधि सचिव एवं पुलिस महानिदेशक सदस्य होंगे ।

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है:- परिपत्र

पुलिस कर्मियों (सैप सहित) को सहाय्य अनुदान

पुलिस बल के कल्याण एवं उनके मनोबल को बनाये रखनें हेतु सरकार ने उग्रवादी , नक्सलवादी एवं संगठित अपराधियों से मुठभेड़ में घायल पुलिस पदाधिकारियों/पुलिस कर्मियों (सैप सहित) को सहाय्य अनुदान देनें का निर्णय लिया है । इसके अंतर्गत

जख्म का प्रकार स्वीकृत की जानेवाली राशि सक्षम प्राधिकार
सामान्य जख्म 50,000/- रू0 तक पुलिस महानिदेशक
गंभीर जख्म/स्थाई जख्म 1,00,000/- रू0 तक पुलिस महानिदेशक
गंभीर जख्म/स्थाई जख्म 1,00,000/- रू0 से
3,00,000/- रू0 तक
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति जिसके सदस्य -
1) गृह सचिव
2) अपर पुलिस महानिदेशक (मु0)
3) स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनोनित पदाधिकारी
4) वित्त विभाग द्वारा मनोनित पदाधिकारी