Schemes of Department

सचिवालय में प्रवेश हेतु पहचान-पत्र

बिहार सचिवालय प्रवेश अनुदेश-1991 के निहित प्रावधानों के आधार पर सचिवालय के विभिन्न भवनों में अधिकारियों /कर्मचारियों एवं आगंतुकों को प्रवेश दिया जाता है।

सचिवालय में पदस्थापित अधिकारियों/कर्मचारियों, तथा सेवानिवृत्त भा0प्र0से0/भा0पु0से0 पदाधिकारियों के लिए स्थायी पहचान-पत्र बिहार सचिवालय प्रवेश अनुदेश 1991 के कंडिका 3 (1) तथा 3 (it) के निहित प्रावधान के आधार पर निर्गत किया जाता है। ये सचिवालय पहचान-पत्र, Beltron, बिहार द्वारा तैयार किए जाते हैं।

वैसे पदाधिकारी एवं कर्मचारी जो सचिवालय संवर्ग के नहीं है अथवा जिनका कार्यालय सचिवालय के परिसर में है अथवा जिन्हें सचिवालय आना जाना पड़ता है, इन्हें क्रास पास, सूचना पदाधिकारी, गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना के हस्ताक्षर से बिहार सचिवालय प्रवेश अनुदेश 1991 की कंडिका 3 (iii) (क) के निहित प्रावधान के तहत जारी किया जाता है।

गैर सरकारी व्यक्तियों को ऐसे क्रास पास निर्धारित शुल्क 10/- कोषागार में सचिवालय प्रवेश पत्र शुल्क शीर्ष में विपत्र कोड-0070608000022 में सचिवालय प्रवेश पत्र शुल्क शीर्ष के माध्यम से जमा करने के उपरांत निर्गत किया जाता है। ऐसे क्रास पास के नवीकरण हेतु 5/- शुल्क निर्धारित है।

कंडिका 3 (v) के विहित प्रावधानों के तहत दैनिक प्रवेश पत्र सचिवालय स्थित आतिथ्य कार्यालयों से निर्गत किये जाते है।

सचिवालय में प्रवेश हेतु प्रवेश-पत्र चार प्रकार के होते हैं

1) सचिवालय के अधिकारियों के लिये पहचान पत्र
2) सचिवालय सम्वर्ग के कर्मचारियों के लिये पहचान-पत्र
3) अस्थाई प्रवेश-पत्र
4) दैनिक प्रवेश-पत्र

1) सचिवालय के अधिकारियों के लिये पहचान पत्र :-
इनके लिये स्थाई पहचान-पत्र निर्गत किये जाते हैं, जिसके लिये एक विहित प्रपत्र है, जिसे विभागीय पदाधिकारियों द्वारा अग्रसारित होना चाहिये ।

2) सचिवालय सम्वर्ग के कर्मचारियों के लिये पहचान-पत्र :-

इनके लिये स्थाई पहचान-पत्र निर्गत किये जाते हैं, जिसके लिये एक विहित प्रपत्र है, जिसे विभागीय पदाधिकारियों द्वारा अग्रसारित होना चाहिये ।

3) अस्थाई प्रवेश-पत्र

यह दो प्रकार के होटल हैं :-

a) क्रास पास :-

यह पास वैसे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को जारी किये जाते हैं, जो सचिवालय सम्वर्ग के नहीं होते हैं, परंतु या तो उनका कार्यालय बिहार सचिवालय के परिसर् में है या उन्हें पटना सचिवालय में प्राय: आना पड़ता है और उनका कार्य सचिवालय के सभी भवनों में स्थित पदाधिकारियों/विभागों में पड़ता है एवं यह सूचना पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होता हैं । इसके लिये विहित प्रपत्र में अंकित सूचना उचित माध्यम से भेजना होता है ।

गैर सरकारी व्यक्तियों को एवं अन्य आपूर्तिकर्ता/ठेकेदारों आदि को निर्धारित प्रपत्र में सूचना उचित माध्यम से आने पर यदि आवश्यकता समझा जायेगा तो क्रास-पास भी जारी किये जा सकते हैं । इसके लिये निर्धारित शुल्क 10/- रूपया कोषागार में निर्धारित शीर्ष में जमा करना होगा ।

b) कार्ड-पास :-

यह पास पदस्थापन की प्रतीक्षारत पदाधिकारी/दैनिक मजदूरों को आवश्यकतानुसार स्वीकृत किये जा सकते हैं । यह पास किसी विशेष भवन में प्रवेश के लिये मान्य होते हैं तथा ये सूचना पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होते हैं । इसकी अवधि चार महीनें के लिये होती है ।

4) दैनिक प्रवेश-पत्र :-

यह प्रवेश-पत्र किसी विशेष भवन/विभाग में किसी विशेष कार्य हेतु जानें के लिये मिलता है । यह प्रति दिन जारी किया जाता है । यह 3:00 बजे अपराह्ण के बाद सम्बन्धित विभाग के सचिवालय के आतिथ्य कार्यालय में बनता है ।

पहचान-पत्र अहस्तांतरणीय है । किसी दूसरे व्यक्ति के परिचय-पत्र/प्रवेश-पत्र के उपयोग करनें वाले कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक या अन्य कानूनी कार्यवाही की जायेगी ।

पहचान-पत्र खो जाने पर इसकी सूचना तुरंत पुलिस थानें एवं सूचना पदाधिकअरियों को देनी चाहिये ।

पहचान-पत्र/प्रवेश-पत्र का वापस करना

सेवानिवृत्त होने पर/सेवा से निकाले जानें पर/स्थानांतरण होनें पर/निलम्बित होनें पर/सचिवालय से बाहर प्रतिनियुक्त होनें पर पहचान-पत्र/प्रवेश-पत्र वापस करना अनिवार्य है ।

नोट- सेवानिवृत्त्त एवं निलम्बन की स्थिति में अलग से 6 माह तक के लिये विशेष परिस्थिति में पास सूचना आने पर जारी किया जा सकता है ।

जे0 पी0 सेनानी सम्मान योजना

लोक नायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में दिनांक-18.03.1974 से 21.03.1977 तक की अवधि में प्रजातंत्र के अस्तित्व को बचाने एवं जनता के मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु चलाये गये आन्दोलन में भाग लेने वाले वैसे व्यक्तियों जो उक्त आन्दोलन के दौरान मीसा/डी0आई0आर0 में एक माह से छ: माह तथा छ: माह से अधिक निरुद्ध रहे हों, को क्रमश: 2500/-(दो हजार पाँच सौ) रूपये एवं 5000/- (पाँच हजार) रूपये ‘‘सम्मान पेंशन’’ एवं संदर्भगत अवधि में एवं इसी कोटि के जेल में मृत एवं पुलिस फायरिंग में मारे गये व्यक्तियों के पति/पत्नी(जो भी लागू हो) को 5000/-पाँच हजार) रूपये एवं पुलिस फायरिंग में गोली से घायल व्यक्तियों को 2500/-(दो हजार पाँच सौ) रूपये मासिक पेंशन देने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।

यह योजना 01 जून, 2009 से प्रभावी है।

जेoपी० सेनानी समाज योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा सलाहकार पर्षद का गठन किया गया है

दिनांक 01.05.2015 के प्रभाव से जेoपीo सेनानियों को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की बसों एवं बुडको की बसों में राज्यान्तर्गत नि:शुल्क बस यात्रा का प्रावधान है।

स्वास्थ्य विभाग बिहार, पटना के संकल्प 873(14), दिनांक 23.07.2015 एवं 271(14), दिनांक- 15.02.2018 द्वारा जे0पी0 सेनानियों एवं उनके पति/ पत्नी (जो भी लागू हो) को निःशुल्क चिकित्सीय सुविधा लागू है।

दिनांक-01.08.2015 के प्रभाव से ऐसे पेंशनरों जिनको 2500/- (दो हजार पाँच सौ) रूपये एवं 5000/-(पांच हजार) रूपये मासिक पेंशन प्राप्त हो रहा था उनके पेंशन में बढ़ोतरी कर क्रमश: 5000/- (पॉच हजार) रूपये एवं 10000/- (दस हजार) रूपये मासिक किया गया है। साथ ही सभी प्रकार के पेंशनरों के मृत्युपरान्‍त उनके पति/पत्नी (Spouse) को भी उसी दर पर पेंशन एवं अन्य सुविधाएँ दिए जाने का प्रावधान है।

जे०पी० आन्दोलन के दौरान जो महिलाएँ जेल गयी थी एवं एक माह से कम भी जेल में निरुद्ध रही थीं एवं उन्होनें जेoपीo आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है उन महिलाओं को मीसा/डीoआई0आर0 की धारा नही लगाए जाने पर भी पेंशन देने का प्रावधान है।

जेoपीo आन्दोलन के दौरान भूमिगत रहे अथवा आन्दोलन में योगदान करने वाले व्यक्तियों का चयन सलाहकार पर्षद द्वारा जिलों में गठित त्रि-सदस्यीय समिति द्वारा अनुशंसा किये जाने पर ऐसे सेनानियों को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देने का प्रावधान है (बशर्ते ऐसे सेनानियों की 18.03.1974 से 21.03.1977 की अवधि में उम्र 14 वर्ष से कम न हों)।

वर्तमान में 3211 सेनानियों को पेंशन की स्वीकृति दी गयी है। जिनमें 2874 सेनानियों को पेंशन का भुगतान किया गया है, जिसमें 80 आश्रिता पेंशनर भी शामिल है।

छ: माह से अधिक अवधि के पेंशनधारियों की संख्या 1033 है एवं छ: माह से कम अवधि के पेंशनधारियों की संख्या 1841 है।

स्वतंत्रता सेनानी सम्मान योजना

वैसे स्वतंत्रता सेनानी/आश्रित जिन्हें केन्द्रीय सरकार से पेंशन की स्वीकृति प्राप्त है, उनको दिनांक-01.08.2015 के प्रभाव से विशेष भत्ता की देयराशि 2000/-रूपये को बढ़ाकर 5000/- प्रतिमाह देने का निर्णय किया गया है। जिसके लिए संकल्प सं0-319 दिनांक-22-07-2015 से आदेश निर्गत किया गया है।

बिहार राज्य अन्तर्गत केन्द्रीय पेंशन स्वीकृत पेंशनधारी के पौत्री/नतिनी की शादी हेतु अनुदान के रूप में 51000/-रूपये की राशि का भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। जिसके लिए संकल्प सं0-396 दिनांक 03.09.2015 से आदेश निर्गत किया गया है।

बिहार राज्य के स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें केन्द्र सरकार से पेंशन स्वीकृत है, उनके पोता-पोती, नाती-नतिनी को राज्य सरकार की सेवाओं में 2% का क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार के ज्ञापांक-13185 दिनांक-03.09.2015 के द्वारा आदेश निर्गत किया गया है।

आतंकवाद/साम्प्रदायिक/नक्सली/सीमापार से गोलीबारी एवं बारूदी सुरंग विस्फोट (Mines/IED Blast) में पीड़ित सिविल व्यक्तियों की सहायता हेतु केन्द्रीय योजना

राज्य में उक्त योजना विभागीय संकल्प संख्या-4419 दिनांक 21-05-2013 द्वारा दिनांक 22-06- 2009 के प्रभाव से लागू है। इसके तहत आतंकवाद/साम्प्रदायिक/नक्सली हिंसा के मामलें में पीड़ित सिविल व्यक्तियों को 300000/- (तीन लाख) रूपया मुआवजा देय है। केन्द्र सरकार द्वारा निर्गत इस योजना की नई मार्गदर्शिका के आलोक में विभागीय संकल्प संख्या-5200 दिनांक 07-06- 2017 द्वारा दिनांक 24-08-2016 के प्रभाव से विषयांकित मामलों में मृत अथवा 50 प्रतिशत अशक्तता की स्थिति में सिविल व्यक्तियों को रूपया 500000/-(पांच लाख) मुआवजा/अनुग्रह अनुदान (ex-gratia) देने का प्रावधान किया गया है एवं इस योजना में सीमापार से गोलीबारी एवं बारूदी सुरंग विस्फोट (Mines IED Blast) में पीड़ित सिविल व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।

इस योजना का उद्देश्य है विषयांकित मामलों में पीड़ितों को केन्द्रीय सहायता राशि उपलब्ध कराना

अनुग्रह अनुदान

आतंकवादी /उग्रवादी /साम्प्रदायिक/ जातीय हमलों/ निर्वाचन सबंधी हिंसा/सामूहिक ह्त्या एवं हिंसा/उग्र भीड़ द्वारा निर्दोष की पिटाई की घटना /बिहार सरकार के किसी कार्यालय परिसर/ पुलिस हाजत/ सिविल कोर्ट इत्यादि में हुई हिंसक घटनाओं में मारे गए व्यक्तियों के आश्रितों/ मारे गए व्यक्तियों (वयस्क अथवा अवयस्क) के माता-पिता / अभिभावक एवं घायल / पीड़ित व्यक्तियों को अनुग्रह अनुदान दिये जाने का प्रावधान है ।

इस योजनांतर्गत :-

प्रति मृतक सामान रूप से - 5,00,000/- रू0
स्थाई रूप से अपंग हुए प्रत्येक व्यक्ति को – 50,000/- रू0
गंभीर रूप से घायल प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम -20,000/- रू०

देनें का प्रावधान है, जिसकी जिला पदाधिकारी के समीक्षोपरांत अनुशंसा पर विभाग के द्वारा आवंटन की जाती है ।

आतंकवादी/उग्रवादी/साम्प्रदायिक/जातीय/उग्र भीड़ द्वारा सामूहिक रूप से हमला किये जानें के क्रम में भवनों/मकानों(आवासीय/व्यापार परिसर्/अन्य कामगार स्थान) के क्षतिग्रस्त होनें पर निम्न रूप से मकान/भवन/परिसर मालिक को अनुग्रह अनुदान देय होगा -

1) पूर्ण रूप से नष्ट/ध्वस्त होनें पर :-
शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के लिये- पक्का मकान - अधिकतम 1,00,000/- रू0 तक
कच्चा मकान- अधिकतम 50,000/- रू0 तक

2) गंभीर क्षति होनें पर :-
शहरी/ग्रामीण क्षेत्र के लिये - अधिकतम 30,000/- रू0 तक

3) मामूली क्षति होनें पर :-
मामूली क्षति होनें पर - अधिकतम 5,000/- रू0 तक

मकानों /दुकानों की क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए मकानों/ दुकानों के मालिकों/ दुकानदारों को भूतलक्षी प्रभाव की तिथी दिनांक 19-07-2013 से अनुग्रह-अनुदान की अधिकतम राशि रू० 2,50,000/- तक अनुमान्य होगी |

उक्त क्षति का आकलन क्षति के परिमाण एवं मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा |

जो भवन / दूकान लोक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया हो, उसके लिए भी उपर्युक्त अनुदान डे नहीं होगा |

जिस भवन का बीमा हुआ हो और उसे बीमा कम्पनी से क्षतिपूर्ति मिलने वाली हो या जो भवन लोक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया हो, उसके लिये यह अनुदान देय नहीं होगा ।

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है |

सामान्य अनुदेश

यदि उपर्युक्त प्रकार के प्रभावित वर्ग व्यापारी समुदाय का हो, जिनका किसी बैंक के माध्यम से कारोबार होता हो, तो उन्हें अपने व्यवसाय में पुन: स्थापित करनें एवं बैंक से ऋण दिलाने में जिला प्रशासन पहल करेगा |

जहां प्रभावित व्यक्तियों को बीमा कंपनियों से कुछ दावों का भुगतान होने वाला हो, वैसे मामलों में भी त्वरित निष्पादन हेतु सबंधित जिला पदाधिकारी, बीमा कंपनियों से संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई करायेंगे |

उग्रवादी, नक्सलवादी एवं संगठित अपराधियों से मुठभेड़ में घायल पुलिस पदाधिकारियों/ पुलिस कर्मियों (सैप सहित) को सहाय्य अनुदान

राज्य में उग्रवादी, नक्सलवादी एवं संगठित अपराधियों से मुठभेड़ के दौरान कई पुलिस पदाधिकारी, पुलिस कर्मी एवं सैप कर्मी घायल हो जाते हैं एवं इनमें से कुछ स्थाई रूप से विकलांग भी हो जाते हैं |

पुलिस बल के कल्याण एवं मनोबल को बनाए रखने हेतु सरकार ने पूर्ण विचारोपरांत उग्रवादी, नक्सलवादी एवं संगठित अपराधियों से मुठभेड़ में घायल पुलिस पदाधिकारियों/ पुलिस कर्मियों (सैप सहित) को सहाय्य अनुदान निम्न प्रकार से प्रावधान किया है :

क्रमांक जख्म का प्रकार स्वीकृत की जानेवाली राशि स्वीकृत हेतु सक्षम प्राधिकार
1 सामान्य जख्म रू० 50,000/- तक पुलिस महानिदेशक, बिहार
2 गंभीर जख्म/ स्थाई विकलांगता रू० 1,00,000/- तक पुलिस महानिदेशक, बिहार
रू० 1,00,000/- से ऊपर 3,00,000/- तक मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में गठित समिति जिसके निम्नांकित सदस्य होंगे :-
1. गृह सचिव
2. अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय)
3. स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनोनीत पदाधिकारी
4. वित्त विभाग द्वारा मनोनीत पदाधिकारी

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है |

कब्रिस्तान की घेराबन्दी
  • राज्‍य में साम्‍प्रदायिक सौहार्द अक्षुण्‍ण बनाए रखने हेतु गैर रैयती भूमि पर अवस्थित विधि-व्‍यवस्‍था की दृष्टिकोण से संवेदनशील कब्रिस्‍तानों की घेराबंदी की योजना है।

  • राज्य में कब्रिस्तान की घेराबंदी राज्य योजना के तहत कराई जा रही है।

  • कब्रिस्तानों की घेराबंदी की योजना वर्ष 1999 से ही कार्यान्वित की जा रही है। यह योजना अगस्त, 2006 से पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही थी ।

  • दिनांक 19-08-2006 से गृह विभाग द्वारा कब्रिस्ता्नों की घेराबंदी का कार्यान्वयन करवाया जा रहा है।

  • कब्रिस्तानों की घेराबंदी के लिए जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से संवेदनशीलता के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाती है और उसी के अनुरूप क्रमबद्ध ढंग से घेराबंदी कराये जाने की नीति है।

  • प्राथमिकता निर्धारण के मापदंड एवं क्रम-कब्रिस्तानों को लेकर किसी विवाद का होना अथवा अतिक्रमण या अतिक्रमण की संभावना या मिश्रित जनसंख्या वाले क्षेत्र में अवस्थित कब्रिस्तान आदि।

  • इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की संशोधित मार्गदर्शिका 2014 की कण्डिका 6(34) में भी कब्रिस्तान की घेराबंदी योजना को शामिल किया गया है।

  • वित्तीय वर्ष 2012-13 से पुरानी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए जिला पदाधिकारी एवं नयी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए स्थानीय क्षेत्रीय अभियंत्रण संगठन (योजना विभाग) को निर्माण एजेंसी घोषित किया गया है।

  • अल्पंसंख्यक कल्‍याण योजनान्तर्गत राज्य के सभी जिलों के द्वारा चयनित सभी 8064 कब्रिस्तानों की घेराबंदी प्राथमिकता के आधार पर करायी जा रही है।

  • राज्य में चयनित 8064 कब्रिस्तानों के विरूद्ध 7063 योजनाऍ ली गयी है जिसमें अबतक 5808 कब्रिस्तानों की घेराबंदी पूर्ण की जा चूकी है। कुल 1255 योजनाऍ अभी लंबित है।

अपराधियों का प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास योजना

अपराधियों की उत्पत्ति के स्त्रोत को रोकनें और दीर्घकालिक रूप से अपराध की ओर गरीबों का झुकाव कम कर अपराधियों को अपराध से विमुख करनें और उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्रिय मुख्य धारा से जोड़्नें हेतु सरकार द्वारा दुर्दांत अपराधियों के प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास की योजना कार्यांवित करनें का निर्णय लिया गया जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पन करनें वाले अपराधियों एवं उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्राप्त हो सके और उनका सर्वांगीण विकास हो सके ।

पात्रता एवं प्रक्रिया-

1). यह योजना दुर्दांत अपराधियों जिनका आपराधिक इतिहास रहा है तथा वे आग्नेयास्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करते हैं ।

2). जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक एवं अपराध अनुसंधान विभाग के प्रतिनिधि की स्क्रीनिंग समिति निर्णय लेगी कि आत्मसमर्पण किन्हीं अन्य कारणों से प्रेरित या प्रायोजित नहीं है ।

3). प्रत्यर्पण करनेवाले अपराधी पूर्व सूचना के उपरांत जिला पदाधिकारी, आरक्षी अधीक्षक अथवा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी एनी प्राधिकारी के समक्ष आत्मसर्पण कर सकते हैं |

4). प्रत्यर्पण करनेवाले अपराधी की स्थिति के अनुसार, यदि उसके विरुद्ध फौजदारी मुकदमा चला रहा है, तो उसे पुलिस के समक्ष और यदि कोइ फौजदारी मुकदमा नहीं चल रहा हो, तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुनर्वास शिविर/ केंद्र में भेजा जाएगा |

5). इस योजना का लाभ पुराने निष्क्रिय अपराधकर्मी को न देकर वर्तमान में सक्रिय अपराधियों को ही दिया जायेगा ।

पुनर्वास योजना एवं अन्य लाभ-

1) प्रत्यर्पण करने वाले अपराधी को तात्कालिक सहायता के रूप में 10,000/- रू0 दिये जायेंगे तथा पुनर्वास योजना की स्वीकृति होनें तक प्रतिमाह 3,000/- रू0 की सहायता दी जायेगी ।
2) तात्कालिक आर्थिक सहायता, पुनर्वास योजना की राशि, अपराधी की गिरफ्तारी हेतु सरकार द्वारा घोषित पुरस्कार-राशि अपराधी एवं उसके द्वारा नामित आश्रित , यदि कोई हो तो के संयुक्त नाम से निकट के राष्ट्रिय बैंक/बिहार राज्य सहकारी बैंक या पोस्ट आफिस में जमा की जायेगी , जिससे प्रतिमाह 3,000/- रू0 से अधिक राशि की निकासी नहीं की जा सकेगी ।
3) पुनर्वास योजना की अधिकतम राशि 2,00,000/- रू0 होगी जिसका 25 प्रतिशत अनुदान एवं 75 प्रतिशत ऋण् स्वरूप होगा ।
4) स्वरोजगार हेतु प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा तय की गयी अधिकतम राशि के सम्तूल्य राशि और/या कृषि योग्य भूमि, सिंचाई के साधन ।
5) इंदिरा आवास की पात्रता रखने वाले को इंदिरा आवास, पात्रता नहीं होने की स्थिति में, इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत अनुमान्य राशि के समान अनुदान राशि सम्मिलित करते हुये बैंको के सहयोग से ऋण स्वीकृत करा कर आवास उपलब्ध कराना ।
6) प्रत्यर्पित अपराधी के विरूद्ध दायर फौजदारी मुकदमा में बचाव के लिये सरकार की ओर से नि:शुल्क वकील की व्यवस्था ।

प्रत्यर्पित हथियारों/विस्फोटकों के लिये प्रोत्साहन-

1) राकेट लांचर/ यूं.एम्.जी. स्काईपैक राईफल - 25,000/- रू0
2) एके-47/56/74 - 15,000/- रू0
3) 303 राईफल/पिस्टल/रिवाल्वर - 3,000/- रू0
4) रिमोट कंट्रोल डिवाईस - 3,000/- रू०
5) रॉकेट - 1000/- रू०
6) ग्रेनेड/ हैण्ड ग्रेनेड - 500/- रू०
7) वायरलेश सेट - 1000/- से 5000/- रू० तक
8) आई.ई.डी. - 3000/- रू०
9) विस्फोटक सामग्री - 1,000/- रू0 (प्रति किलो)
10) एम्यूनिशन (प्रति सामान) - 3/- रू०

इस योजना के कार्यांवयन की समीक्षा जिला स्तर पर प्रत्येक माह जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित पुनर्वास समिति ( जिसके सदस्य आरक्षी अधीक्षक, उप विकास आयुक्त), प्रमण्डल स्तर पर पत्येक तीन माह पर् प्रमण्डलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति, जिसमें क्षेत्रीय आरक्षी उप- महानिरीक्षक सदस्य होंगे, की समीक्षात्मक टिप्पणियां राज्य सरकार को भेजी जायेंगी । राज्य स्तर पर इसकी समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक छ: माह पर की जायेगी, जिसमें विकास आयुक्त, वित्त आयुक्त, गृह आयुक्त, विधि सचिव एवं पुलिस महानिदेशक सदस्य होंगे ।

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है |

वामपंथी उग्रवादियों के प्रत्यर्पण (Surrender)-सह-पुनर्वासन (Rehabilitation) योजना

इस योजना का उद्देश्य उन वामपंथी उग्रवादियों की सहायता करना है, जो हिंसा का त्याग कर आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते है। यह योजना एक बहुउद्देशीय रणनीति का अंग है, जिसका कार्यान्वयन हिंसा करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के समानान्तर किया जा रहा है। यह योजना वामपंथी उग्रवाद से विमुख लोगों को रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर प्रदान करने से संबंधित है, जिससे वे समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें एवं पुनः वामपंथी उग्रवाद गतिविधियों में शामिल न हो।

गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा निर्देश के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 11144 दिनांक-12.12.2013 द्वारा वामपंथी उग्रवादियों के समर्पण-सह-पुनर्वासन (Surrender-cum Rehabilitation) हेतु नई नीति का निर्धारण किया गया, जो दिनांक-01.04.2013 से 31.03.2016 तक प्रभावी थी। पुनः विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10228 दिनांक-28-11.2017 द्वारा इस योजना को दिनांक 31.03.2016 के पश्चात् भी प्रभावी बनाए रखा गया है |

उद्देश्य

1). वामपंथी उग्रवाद में फंसा महसूस कर रहे उग्रवादियों को वामपंथी उग्रवाद गतिविधियों से अलग करना |

2). इसे सुनिश्चित करना की आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी पुन: वामपंथी उग्रवादी आन्दोलन की ओर आकृष्ट न हों |

नोट : सुनियोजित रणनीति के तहत आत्मसमर्पण कर इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक उग्रवादियों को आत्मसमर्पण की अनुमति नहीं दी जाएगी |

पात्रता

1). यह योजना उन वामपंथी उग्रवादियों पर प्रभावी होगी, जो शास्त्र सहित/ रहित समर्पण करते हैं |

2). राज्य सरकार द्वारा गठित समर्पण -पुनर्वासन समिति यथोचित जांच कर पात्रता निर्धारित करेगी |

3). पूर्व समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों पर प्रभावी नहीं होगी |

योजनान्तर्गत लाभ

उच्च स्तरीय वामपंथी उग्रवादियों जैसे-
राज्य समिति के सदस्य
क्षेत्रीय समिति के सदस्य
केन्द्रीय समिति के सदस्य
पोलित ब्यूरो के सदस्य
के समर्पण करनें पर तात्कालिक सहायता के रूप में रू० 2,50,000/-

माध्यम/ निम्नस्तरीय वामपंथी उग्रवादियों जैसे-
एरिया कमांडर
उपक्षेत्रीय कमांडर
क्षेत्रीय कमांडर
जांच -सह- पुनर्वासन समिति द्वारा इंगित एनी हार्डकोर वामपंथी उग्रवादी
के समर्पण करनें पर तात्कालिक सहायता के रूप में रू० 1,50,000/- देय होगी | इसा राशि को आत्मसमर्पित व्यक्ति के नाम से सावधि जमा के रूप में बैंक में रखा जाएगा जो आत्मसमर्पण करनें की तिथी से 3 साल पूरा करनें पर उन्हें भुगते होगा, बशर्ते उसके अच्छे व्यवहार के लिए पुलिस महानिदेशक द्वारा राज्य सरकार से अनुशंसा की गयी हो |

प्रत्यर्पित हथियारों/विस्फोटकों के लिये प्रोत्साहन-

क्र०सं० हथियार प्रोत्साहन राशि
1 एल०एम०जी० / जी०पी०एम०जी०/ पीका/ आर०पी०जी०/स्नाईपर/रायफल/रोकेट प्रक्षेपक/समान्तर हथियार 35,000/- रू० प्रत्येक हथियार
2 ए० के० 47/56/74 रायफल 25,000/- रू० प्रत्येक हथियार
3 पिस्टल/ रिवोल्वर /एस०एल०आर०/कार्बाइन/स्टेनगन/.303 10,000/- रू० प्रत्येक हथियार
4 रॉकेट 1,000/- रू० प्रत्येक हथियार
5 ग्रेनेड/हैण्ड ग्रेनेड/ स्टिक ग्रेनेड 500/- रू० प्रत्येक हथियार
6 रिमोट कंट्रोल उपकरण 3,000/- रू० प्रत्येक उपकरण
7 एम्यूनिशन सभी प्रकार के 3/- रू० प्रत्येक
8 आई.ई.डी. (Improvised Explosive Device) 1000/- रू० प्रत्येक
9 माइंस 3000/- रू० प्रत्येक
10 विस्फोटक सामग्री 1000/- रू० प्रत्येक किलोग्राम
11 वायरलेश सेट
a) कम रेंज
b) ज्यादा रेंज

1000/- रू० प्रति सेट
5000/- रू० प्रति सेट
12 सेटेलाईट फोन 10,000/- रू० प्रति सेट
13 वी०एच०एफ़० /एच०एफ़० कम्यूनिकेशन सेट 5,000/- रू० प्रति सेट
14
a) इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर्स
b) अन्य डेटोनेटर्स

50/- रू० प्रत्येक
10/- रू० प्रत्येक

नोट : दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पण करने वाले के नाम से बैंक में सावधि जमा कराई जायेगी जो उसे आत्मसमर्पण के तीन साल बाद भुगतेय होगी, बशर्ते उसके अच्छे व्यवहार के लिए पुलिस महानिदेशक द्वारा अनुमोदन किया गया हो |

इस योजना के अंतर्गत पात्रता रखनेवाले को उसकी रुचि के अनुसार रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जायेगा |

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है |

हथियारों की देख-रेख

वामपंथी उग्रवादियों द्वारा समर्पित हथियारों एवं गोला बारूद को सुरक्षित रखने की व्यवस्था पुलिस महानिदेशक द्वारा की जायेगी |

पुनर्वासन हेतु उग्रवादियों के पहचान का तरीका

वामपंथी उग्रवादियों के समर्पण एवं पुनर्वासन की पात्रता राज्य स्तरीय समर्पण-सह-पुनर्वासन समिति निम्न प्रकार गठित की जायेगी -


i) अपर पुलिस महानिदेशक (विशेष शाखा) : समर्पण -सह- पुनर्वासन पदाधिकारी एवं अध्यक्ष ii)विशेष सचिव, गृह विभाग (विशेष शाखा) : सदस्य iii)पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) : सदस्य iv) निदेशक (नियोजन एवं प्रशिक्षण), श्रम संसाधन विभाग : सदस्य v)पुलिस महानिरीक्षक/ उप महानिरीक्षक (के०रि०पु०ब०) : सदस्य vi)पुलिस महानिरीक्षक/ उप महानिरीक्षक (स०सी०ब०) : सदस्य

वामपंथी उग्रवादी सी०ए०पी०एफ़० के किसी यूनिट, जिला दंडाधिकारी, जिला पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय पुलिस उपमहानिरीक्षक, प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) या राज्य सरकार द्वारा अन्य नामित पदाधिकारी के साथ-साथ सेना के किसी यूनिट अथवा राज्य के बाहर सी०ए०पी०एफ़० के किसी यूनिट के समक्ष समर्पण कर सकता है |

वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वासन के लिए राज्य स्तरीय समर्पण-सह-पुनर्वासन समिति के सहयोग हेतु जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग समिति होगी, जिसमें जिला पुलिस अधीक्षक एवं विशेष शाखा के प्रतिनिधि सदस्य होंगे |

जाँच प्रक्रिया हेतु मानक

(i) वैसे वामपंथी उग्रवादी, जिन्होने आत्मसमर्पण किया है, उन्हे कंडिका-5 (i) में परिभाषित वामपंथी उग्रवादी कैडर का होना चाहिए तथा उसका समर्पण राज्य सरकार द्वारा संचालित व्यापक समर्पण-सह-पुनर्वास योजना के अनुरुप होना चाहिए।

(ii) राज्य सरकार द्वारा इस आशय के लिए निर्दिष्ट समर्पण-सह-पुनर्वासन पदाधिकारी को पूर्ण समाधान होना चाहिए कि समर्पित उग्रवादी सही मायने में वामपंथी उग्रवादी कैडर का है। समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कैडर द्वारा आत्मस्वीकृति (confession) किया जाना चाहिए, जिसमें उसके द्वारा किए गए सभी आपराधिक कृत्यों के साथ-साथ षड्यंत्र का नाम, अन्य भागीदार, वित्तपोषकों का नाम, शरणदाताओं, संदेशवाहकों, वामपंथी उग्रवादी संगठन से । संबंधित विस्तृत ब्योरा हथियार/ गोला-बारुद एवं वामपंथी उग्रवादी कैडर द्वारा लूटी गई। बाँटी गई/ व्ययनित सम्पत्ति के साथ-साथ जिस वामपंथी उग्रवादी कैडर से वह संबंधित है, उसकी पूर्ण जानकारी दी जाएगी।

समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कैडर से संबंधित सदस्यों की गतिविधि की जानकारी संबंधित प्राधिकार/संगठन से प्राप्त होते ही समर्पण-सह-पुनर्वासन पदाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति समर्पण के संबंध में निर्णय लेगी तथा स्वीकार योग्य होने पर उसे पुनर्वास हेतु चयनित कर लेगी।

पुनर्वास हेतु चयनित वामपंथी उग्रवादियों को उनकी इच्छा/अभिरुचि के अनुरुप व्यवसाय/वोकेशनल प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ऐसे प्रशिक्षणों की व्यवस्था/संचालन करेगी तथा इस संबंध में राज्य स्तर पर गठित समर्पण-सह-पुनर्वासन पदाधिकारी को सूचना देगी। साथ ही राज्य सरकार समर्पण-सह-पुनर्वासन पदाधिकारी को मासिक भत्ता प्रदान करने हेतु आवश्यक निधि उपलब्ध कराएगी, ताकि प्रत्येक महीने भुगतान किया जा सके। भत्ते की दरे राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर इस प्रयोजनार्थ निर्गत अधिसूचना के आधार पर होगी।

न्यायालय संबंधी मामले

समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कैडर के सदस्यों द्वारा किये गए गंभीर आपराधिक कृत्यों का विचारण सक्षम न्यायालय में जारी रहेगा। राज्य सरकार समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कैडर के सदस्यों के पूर्व आपराधिक इतिहास/व्यक्तिगत आपराधिक कृत्यों को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न मामलों में अभियोजन वापसी के संबंध में भी आवश्यक विचार करेगी। लघु अपराधों में राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकार द्वारा स्वविवेक से plea bargaining की अनुमति दी जा सकेगी। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित माप दण्डों के आधार पर समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कैडर के सदस्यों को निःशुल्क विधिक सेवा प्रदान की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार समर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादी कैडर के सदस्यों के मामले में त्वरित विचारण हेतु त्वरित न्यायालयों का गठन आवश्यकतानुसार कर सकेगी।

. पुनर्वासन प्रक्रिया

समर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास हेतु राज्य सरकार के गृह विभाग के प्रधान सचिव/सचिव पुनर्वास पदाधिकारी के रुप में निर्दिष्ट किये जाते हैं। पुनर्वास पदाधिकारी समर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वासन से संबंधित रोजगार/स्वरोजगार हेतु तथा आवश्यकता पड़ने पर इस योजना के अन्तर्गत दी जाने वाली अनुदान की राशि (दो लाख पचास हजार रुपये/एक लाख पचास हजार रुपये) मात्र के भुगतान हेतु राज्य के सभी विभागों के बीच समन्वय का काम करेंगे।/p>

बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना

राज्य सरकार कल्याणकारी दायित्व के निर्वहन हेतु राज्य के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने एवं संपत्तियों की रक्षा हेतु सतत प्रयत्नशील है। मंदिरों में रखी बहुमूल्य मूर्तियाँ, मुकुट, छत्र, आभूषण आदि की सुरक्षा हेतु मंदिरो की पक्की मजबूत चहारदीवारी का निर्माण कराये जाने का राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है। मंदिर चहारदीवारी निर्माण हेतु बिहार राज्य भवन निर्माण निगम को निर्माण एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। चूंकि राज्य में पूर्व से कब्रिस्तान की जमीन की चहारदीवारी का निर्माण कार्य स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन द्वारा कराया जा रहा है, अतएव मंदिर के चहारदीवारी के निर्माण का कार्य भी स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन से ही कराया जाना उपयुक्त मानते हुए योजना के प्रशासी विभाग, विधि विभाग के स्थान पर गृह विभाग, बिहार, पटना को बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस योजना का कार्य राज्य योजना मद से गृह विभाग (विशेष शाखा) के द्वारा कराया जाएगा तथा इसके क्रियान्वयन के लिए बिशा-निर्देश निम्नवत होंगे :

अर्हताएँ

किसी मंदिर के चहारदीवारी के निर्माण के लिए निम्नलिखित अर्हताएँ आवश्यक होंगी :

i) "मंदिर” से कोई देवालय, मठ या कोई भी पूजा-स्थल अभिप्रेत होगा

ii)मंदिर को सार्वजनिक होना

iii)मंदिर का निबंधन बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद में होना

iv)मंदिर के पास चहारदीवारी के लिए अपनी जमीन का होना

v) मंदिर का निर्माण कम-से-कम साठ साल पहले हुआ हो या ऐसे मंदिर हो जिसके निर्माण से बिहार में पर्यटन की संभावना बढ़ती हो या ऐसे मंदिर जहाँ विधि-व्यवस्था या सुरक्षा का प्रश्न उत्पन्न हो गया हो

vi)"बिहार अनधिकृत धार्मिक संरचना निर्माण सर्वेक्षण एवं विनियमन, पुनस्र्थापन एवं इसका निराकरण (Removal) नियमावली 2013" के अन्तर्गत अनधिकृत धार्मिक संरचना के रूप में चिन्हित अथवा परिभाषित न हो

स्थल चयन

मंदिर की चहारदीवारी के निर्माण के लिए स्थल चयन निम्नरूपेण होगाः

(i) जिला स्तर पर मंदिरों की चहारदीवारी निर्माण के लिए उसका चयन जिला स्तरीय दो सदस्यीय समिति द्वारा किया जायेगा ।

(ii) प्रत्येक जिला में समिति के अध्यक्ष जिला पदाधिकारी होंगे और उसके सदस्य पुलिस अधीक्षक होंगे।

निर्माण एजेन्सी एवं योजना का क्रियान्वयन

(i)"बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना के तहत राज्य में मंदिरों की पक्की चहारदीवारी का निर्माण योजना एवं विकास विभाग, पटना के नियंत्रणाधीन कार्यरत स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के माध्यम से कराया जाएगा।

(ii)चहारदीवारी की ऊँचाई लगभग 8 फीट होगी।

(iii) जिला पदाधिकारी द्वारा योजना के शुरूआत में मात्र एक बार जिलान्तर्गत पंजीकृत सभी मंदिरों की सूची की मांग धार्मिक न्यास पर्षद से की जायेगी। ततपश्चात् इन मंदिरों की संवेदनशीलता एवं मूर्तियों की चोरी के दृष्टिकोण से आसन्न खतरे के बिन्दु पर कण्डिका 3 (i) में गठित समिति द्वारा स्वतंत्र रूप से सर्वेक्षण कराया जायेगा तथा इसके आधार पर मंदिरों की चहारदीवारी के निर्माण के लिए जिला स्तर पर एक प्राथमिकता सूची तैयार की जायेगी। योजना का अग्रेतर कार्यान्वयन जिला स्तरीय समिति द्वारा इस प्राथमिकता सूची के आधार पर किया जायेगा |

(iv) जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा स्थल चयन के उपरांत योजना की रवीकृति संबंधित जिला पदाधिकारी द्वारा दी जायेगी तथा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन द्वारा उसका प्राक्कलन तैयार किया जाएगा।

(v) प्राक्कलन पर सक्षम स्तर से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करते हुए अपेक्षित राशि के आवंटन हेतु अधियाचना संबंधित जिला पदाधिकारी के माध्यम से गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना को भेजी जाएगी।

(vi)अधियाचित राशि गृह विभाग (विशेष शाखा), बिहार, पटना द्वारा संबंधित स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के कार्यपालक अभियंता को विमुक्त (आवंटित की जाएगी।

(vii)जिला पदाधिकारी एवं वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं समीक्षा समय-समय पर की जाएगी तथा स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन चहारदीवारी का निर्माण कार्य विनिश्चित अवधि में पूर्ण करेगा।

(viii)राशि की प्राप्ति के तीन माह के भीतर स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन द्वारा कार्य प्रारंभ किया जाना अनिवार्य होगा।

(ix)स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के संबंधित कार्यपालक अभियंता राशि के व्यय के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी होंगे।

योजना का अनुश्रवण

"बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना के क्रियान्वयन का अनुश्रवण मुख्य सचिव, बिहार के स्तर से किया जायेगा।

योजना की स्वीकृति

"बिहार मंदिर चहारदीवारी निर्माण योजना अन्तर्गत चहारदीवारी निर्माण से संबंधित प्राक्कलन की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति हेतु वित्तीय राशि की अधिसीमा निम्नवत होंगेः

प्रशासनिक स्वीकृति

सक्षम पदाधिकारी स्वीकृति हेतु अधिसीमा
प्रधान सचिव/सचिव, गृह विभाग 2 करोड़ रूपये से 2.5 करोड़ रूपये तक
प्रमण्डलीय आयुक्त 50 लाख से 2 करोड़ रूपये तक
जिला पदाधिकारी 50 लाख रूपये तक

तकनीकी स्वीकृति

सक्षम पदाधिकारी स्वीकृति हेतु अधिसीमा
मुख्य अभियंता 2 करोड़ रूपये से 2.5 करोड़ रूपये तक
अधीक्षण अभियंता 50 लाख से 2 करोड़ रूपये तक
कार्यपालक अभियंता 50 लाख रूपये तक

विस्तृत जानकारी हेतु इस सम्बन्ध में निर्गत परिपत्रों का अवलोकण किया जा सकता है |

प्रमाण-पत्रों का प्रतिहस्ताक्षरण

विदेश में प्रयुक्त होने वाले व्यक्तिगत कागजातों के प्रारंभिक प्रतिहस्ताक्षरण के लिए गृह विभाग (विषेष शाखा) के नामित पदाधिकारी प्राधिकृत हैं। कागजातों के प्रतिहस्ताक्षर के लिए निम्न कागजात प्रस्तुत करना अनिवार्य हैः-

1.उप सचिव, गृह विभाग (विशेष शाखा), विदेशी प्रशाखा को संबोधित आवेदन
2.प्रतिहस्ताक्षरित कराए जाने वाले कागजात की मूल प्रति एवं स्वहस्ताक्षरित छायाप्रति
3.कागजातों से संबंधित व्यक्ति/व्यक्तियों के पारपत्र के प्रथम एवं अंतिम (व्यक्ति विवरण वाले) पृष्ठ की छायाप्रति
4.यथास्थिति अन्य समर्थक साक्ष्य

विहित प्रक्रिया के अनुसार गृह विभाग से प्रतिहस्ताक्षरित होने के बाद विदेश मंत्रालय से व्यक्तिगत प्रमाण-पत्रों यथा, जन्म, मृत्यु, विवाह, पी0भी0आर0 इत्यादि का अंतिम रूप से Appostile कराने की आवश्यकता होती है, जिसके बाद विदेशों में ये कागजात मान्य होते हैं।

राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून प्रवेश परीक्षा

राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अन्तर्गत श्रेणी 'ए' का प्रतिष्ठान है, जो रक्षा प्रशिक्षण निदेशालय, सेना मुख्यालय के अधीन कार्य करता है।

इस कॉलेज में प्रत्येक वर्ष जनवरी एवं जुलाई सत्रों में योग्यता प्रदायी प्रवेश परीक्षा द्वारा कक्षा-8 में छात्रों का नामांकन कराया जाता है। यहाँ पर छात्रों को बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा प्रदान की जाती है।

गृह विभाग द्वारा राज्य के अर्हता प्राप्त छात्रों के लिए राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून के सौजन्य से प्रत्येक कैलेन्डर वर्ष में दो बार-01, 02 जून एवं 01, 02 दिसम्बर को योग्यता प्रदायी प्रवेश परीक्षा का संचालन किया जाता है। अध्यक्ष, राजस्व पर्षद, बिहार की अध्यक्षता में गठित चयन समिति द्वारा प्रवेश परीक्षा में राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून द्वारा उत्तीर्ण घोषित छात्रों की मौखिक परीक्षा ली जाती है। प्रत्येक प्रवेश परीक्षा में बिहार राज्य से दो (2) छात्रों का चयन होता है।

राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून में अध्ययनरत बिहार राज्य के अधिवासी छात्रों को प्रतिवर्ष 30,000/- (तीस हजार रूपये) मात्र की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

निजी सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005 का प्रवर्तन

बिहार राज्य में निजी सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा-25 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार विधान मंडल द्वारा पारित एवं गृह विभाग की अधिसूचना संख्या-13950, दिनांक-22.09.2011 द्वारा अधिसूचित बिहार निजी सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) नियमावली, 2011 प्रवृत्त है।

गृह (विशेष) विभाग, बिहार सरकार द्वारा अधिसूचना सं0-14553, दिनांक-17.10.2011 के माध्यम से नियंत्री प्राधिकारी के रूप में विशेष सचिव, गृह (विशेष) विभाग, बिहार, पटना को पदाभिहित किया गया है।

गृह विभाग की अधिसूचना सं0-10148, दिनांक-24.11.2077 के द्वारा बिहार निजी सुरक्षा अभिकरण (संशोधन) नियमावली, 2017 लागू की गयी है, जिसके माध्यम से अधिनियम की धारा 7(2) में अभीष्ट शपथ-पत्र का विहित प्रारूप प्रस्तुत किया गया है तथा अनुज्ञप्ति के नवीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

राज्य सरकार द्वारा निर्गत अनुज्ञप्तियों की सूची गृह विभाग, बिहार सरकार की वेबसाईट www.home.bih.nic.in के “Security Agencies Info.” पृष्ठ पर भी उपलब्ध है जिसे समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। इसके अवलोकन से वैध अनुज्ञप्तिधारियों की सूची के अतिरिक्त ऐसे अभिकरणों की सूचना प्राप्त की जा सकती है, जिनके द्वारा समर्पित अनुज्ञप्ति हेतु आवेदन को मानकों पर खरा न उतरने के कारण अस्वीकृत किया गया है।

राज्य में निजी सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005 तथा बिहार निजी सुरक्षा (विनियमन) नियमावली, 2011 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी एवं नियंत्रण तथा बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त किये निजी सुरक्षा एजेंसी का कारोबार करने वाले व्यक्तियों/एजेंसियों के विरूद्ध नियम सम्मत कार्रवाई हेतु सभी पुलिस अधीक्षकों, सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक एवं सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षकों, सभी विभागाध्यक्षों तथा राज्य में केन्द्र सरकार के अधीन कार्यरत सभी प्रमुख प्रतिष्ठानों को अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु दिशा-निर्देश दिये गये हैं। इसके अतिरिक्त, आम जनता, निजी प्रतिष्ठानों एवं अन्य में अधिनियम के प्रावधानों एवं बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसी को तत्संबंधी व्यवसाय में संलग्न न किए जाने संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए समय-समय पर समाचार पत्रों में प्रेस विज्ञप्ति का भी प्रकाशन किया गया है।

"अपराध के दीवानी अंजाम” (civil consequences of crime)

राज्य में कानून का राज (Rule of Law) स्थापित करने के उद्येश्य से राज्य सरकार द्वारा आपराधिक मुकदमों के ‘‘स्पीडी ट्रायल’’ का कार्यक्रम शुरु किया गया था, जिसके अन्तर्गत विभिन्न आपराधिक मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर अनेक अपराधियों को सजा दिलवाई गयी है। इसका काफी सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर हुआ है, स्पीडी ट्रायल के कारण विहित कानूनी प्रक्रिया के अन्तर्गत अपराधियों को काफी कम समय में सजा दिलवाने से प्रभावी ढंग से अपराध नियंत्रण हेतु कार्रवाई की गयी है।

‘‘स्पीडी ट्रायल’’ की सफलता के पश्चात राज्य सरकार द्वारा ‘‘स्पीडी अपील’’ की प्रक्रिया शुरु की गयी, जिसके अन्तर्गत आपराधिक कांडों में न्याय निर्णय के विरुद्ध अपील की प्रक्रिया को त्वरित गति से निष्पादन कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए न्यायिक अपील की प्रक्रिया से जुड़े हुए विभिन्न बिन्दुओं से संबंधित bottlenecks (गतिरोध) को दूर करने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि अपीलों का निष्पादन त्वरित रुप से हो सके तथा न्यायिक अपील में ज्यादा समय लगने से अपराधी लाभ नहीं उठा सकें।

स्पीडी ट्रायल मात्र एक concept नहीं था, बल्कि अपराध नियंत्रण की दिशा में एक चरणबद्ध योजनान्तर्गत प्रयास था, जिस योजना की अगली कड़ी ‘‘स्पीडी अपील’’ के रुप में लागू की गयी तथा उसकी अगली कड़ी के रुप में CIVIL CONSEQUENCES OF CRIME योजना के अन्तर्गत नई शुरुआत की गई है। इसके अन्तर्गत किसी भी प्रकार के आपराधिक मुकदमों में सजा प्राप्त वैसे व्यक्ति, जिनकी अपील (सजा के विरुद्ध) सक्षम न्यायालय द्वारा अस्वीकृत कर दी गयी है, के संबंध में विस्तृत विवरणी बनाकर वेबसाईट पर डाला गया है जिसे कोई भी व्यक्ति (http://210.212.23.53/prison) या गृह विभाग, बिहार के वेबसाईट (http://home.bih.nic.in) पर क्लिक कर देख सकता है। इस वेबसाईट पर ऐसे व्यक्तियों का नाम, पता, आपराधिक मुकदमें की विवरणी, सजा की विवरणी इत्यादि उपलब्ध कराई गयी है।

ऐसा देखा गया है कि कई प्रकार के फार्म/आवेदन में, चाहे वे नौकरी या किसी प्रकार के लाईसेंस या व्यवसाय या सरकारी सहायता या सरकारी कॉन्ट्रैक्ट इत्यादि से संबंधित हों, में इस आशय की जानकारी मांगी जाती है कि क्या आवेदक को किसी मामले में सजा हुई है या नहीं, लेकिन कई बार इस सूचना को ऐसे व्यक्ति द्वारा छुपा लिया जाता है, जिस कारण उन्हें विभिन्न प्रकार के लाभ/लाईसेंस/कार्य इत्यादि मिल जाते हैं। इस वेबसाईट के launch होने के पश्चात अब ऐसी कोई भी सूचना छिपाई नहीं जा सकती है तथा कोई भी सरकारी विभाग अथवा प्राईवेट कम्पनी ऐसे व्यक्ति के संबंध में इस वेबसाईट के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ऐसे व्यक्तियों, जो किसी भी आपराधिक मुकदमें में सजा प्राप्त हों (अपील अस्वीकृत), को विभिन्न प्रकार के लाभों से वंचित किये जाने पर विचार किया जा सकता है यथा :-

1. शस्त्र लाईसेंस
2. सरकारी जन वितरण प्रणाली की अनुज्ञप्ति
3. चरित्र प्रमाण पत्र में प्रतिकूल टिप्पणी
4. विभिन्न सरकारी ठेकों (निविदाओं) में अयोग्यता
5. सरकारी सेवा में स्थायी/अनुबंध के आधार पर नौकरी में इस आशय की टिप्पणी
6. पासपोर्ट निर्गत करते समय चरित्र प्रमाण पत्र
7. सार्वजनिक उपक्रमों से संबंधित विभिन्न प्रकार के लाईसेंस, पेट्रॉल पम्प, गैस एजेंसी ईत्यादि के लाईसेंस
8. किसी भी प्रकार के सरकारी सहायता प्राप्त करने वाले एन.जी.ओ./संस्था में ऐसे व्यक्ति के पदधारक होने पर सरकारी सहायता या कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने पर विचार करना।
9. बैंक अथवा सरकारी संस्थाओं से ऋण लेते समय इस आशय की सूचना दिया जाना।
10. सरकारी ठेका/कार्य/निविदा से वंचित करना।
11. किसी प्राईवेट कम्पनी या संस्था द्वारा कॉन्ट्रैक्ट देने हेतु/नौकरी देने हेतु/ कार्य देने हेतु किसी व्यक्ति के संबंध में जानकारी प्राप्त करना चाहे तो वे भी इस वेबसाईट को देखकर ऐसे व्यक्ति के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उसके आधार पर उचित निर्णय ले सकते हैं।

इस योजना का यह भी उद्येश्य है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अपराध करते समय यह भली-भाँति समझ लें कि अपराध करने के बाद न सिर्फ सजा हो सकती है, बल्कि सजा के अलावा उन्हें अन्य कई तरह की सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ सकता है तथा उन्हें तमाम तरह की कठिनाईयाँ हो सकती है।

इस प्रकार की कार्रवाई पूरे देश में पहली बार बिहार राज्य में की जा रही है जो कानून का राज्य स्थापित करने में एवं अपराध पर प्रभावकारी नियंत्रण करने में ठोस एवं कारगर कदम सिद्ध होगा।

इस डाटाबेस को देखने के लिए http://210.212.23.53/prison को क्लिक किया जा सकता है या गृह विभाग, बिहार के वेबसाईटhttp://home.bih.nic.in के होम पेज पर CIVIL CONSEQUENCES OF CRIME नाम का एक लिंक बनाया गया है, जिस पर क्लिक करने के बाद भी यह डाटाबेस खुल सकेगा, जिसे कहीं भी किसी के भी द्वारा आसानी से देखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इस डाटाबेस में जिलावार, जेलवार, पी.एस. नम्बर, जी.आर. नम्बर, एस.टी.आर. नम्बर, कैदी का नाम, पिता का नाम, कारा में प्रवेश की तिथि एवं कारा मुक्ति की तिथि, सजा होने की तिथि अथवा अपील की स्थिति के अनुसार विभिन्न तरीकों से ेमंतबी कर देखा जा सकता है।

Honour Killing एवं खाप पंचायतों की अवैध गतिविधियाँ

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Writ Petition (Civil) No. 231 of 2010, जो Honour Killing एवं खाप पंचायतों की अवैध गतिविधियों से संबंधित है, में अंतिम आदेश पारित किया गया है।

आदेश में इस समस्या के समाधान हेतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 1. निरोधात्मक, II. सुधारात्मक एवं III. दंडात्मक कार्रवाई करने का निदेश दिया गया है।

न्यायालय के आदेश के आलोक में निम्न कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है :-

(I) निरोधात्मक कदम (Preventive Steps) :-
(क) अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा राज्य के वैसे जिलों, अनुमण्डलों, पुलिस थानों एवं गाँवों को चिन्हित किया जाए, जहाँ विगत पाँच वर्षों में Honour Killing अथवा खाप पंचायतों के आहूत किए जाने की घटना प्रतिवेदित हुई है। इस सूची को राज्य सरकार द्वारा विधिवत संसूचित किया जाएगा।
(ख) सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक ऊपर कंडिका में चिन्हित पुलिस थानों में से अपने जिले में अवस्थित थानों के थानाध्यक्षों को अंतरजातीय एवं अंतर-धर्म विवाहों के संबंध में अधिक सतर्क रहने का आदेश देंगे।
(ग) यदि खाप पंचायत के आहूत किए जाने की सूचना किसी पुलिस पदाधिकारी अथवा जिला प्रशासन के किसी पदाधिकारी के संज्ञान में आती है तो वे अविलम्ब इसकी सूचना अपने वरीय पदाधिकारियों को देंगे। साथ ही उस क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक को भी अविलम्ब सूचित करेंगे।
(घ) ऐसी सूचना प्राप्त होने पर पुलिस उपाधीक्षक अविलम्ब खाप पंचायतों के सदस्यों से सम्पर्क करेंगे एवं उन्हें सूचित करेंगे कि ऐसी बैठक कानूनसम्मत नहीं है। तथा वे ऐसी किसी बैठक का आयोजन न करें। साथ ही उस इलाके के थानाध्यक्ष को सतर्क रहने एवं आवश्यकतानुसार पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति करने का निदेश देंगे जिससे उपरोक्त बैठक के आयोजन को रोका जा सके।
(च) यदि इसके बावजूद खाप पंचायत आहूत की जाती है तो पुलिस उपाधीक्षक स्वयं उस स्थल पर मौजूद रहेंगे। वे इस बैठक में भाग ले रहे सभी लोगों को निदेशित करेंगे कि वे कोई भी ऐसा निर्णय न लें, जिससे अंतरजातीय/ अंतर-धर्म संबंध वाले युगल जोड़े अथवा उनके परिवार के सदस्यों को किसी प्रकार का नुकसान हो। ऐसा करने में विफल होने पर उपरोक्त बैठक में भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों एवं आयोजकों को कानूनन अभियोजित किया जाएगा। पुलिस उपाधीक्षक इस बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करायेंगे, जिसके आधार पर सभी भाग लेने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यकता होने पर समुचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
(छ) यदि पुलिस उपाधीक्षक को खाप पंचायत के सदस्यों से सम्पर्क करने पर ऐसा महसूस होता है कि अंतरजातीय/अंतर-धर्म युगल जोड़े अथवा उसके परिवार को नुकसान पहुँचाए जाने की आशंका है तो वह जिला पदाधिकारी/अनुमंडल पदाधिकारी को दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत निषेधाज्ञा (धारा 144 द0प्र0सं0) निर्गत करने का प्रस्ताव समर्पित करेंगे एवं पंचायत में भाग लेने वालों की गिरफ्तारी (धारा 151 दं0प्र0सं0) करेंगे।
(ज) अपराध अनुसंधान विभाग सभी कानून प्रवर्तन एजेंसी (Law Enforcement Agencies) एवं इस प्रक्रिया के सभी भागीदारों को ऐसी हिंसा रोकने तथा संविधान में निहित सामाजिक न्याय एवं कानून के राज के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रशिक्षित एवं जागरूक बनाने को प्रयास करेगा।

राज्य में निजी सुरक्षा अभिकरण (विनियमन) अधिनियम, 2005 तथा बिहार निजी सुरक्षा (विनियमन) नियमावली, 2011 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी एवं नियंत्रण तथा बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त किये निजी सुरक्षा एजेंसी का कारोबार करने वाले व्यक्तियों/एजेंसियों के विरूद्ध नियम सम्मत कार्रवाई हेतु सभी पुलिस अधीक्षकों, सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक एवं सभी प्रक्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षकों, सभी विभागाध्यक्षों तथा राज्य में केन्द्र सरकार के अधीन कार्यरत सभी प्रमुख प्रतिष्ठानों को अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु दिशा-निर्देश दिये गये हैं। इसके अतिरिक्त, आम जनता, निजी प्रतिष्ठानों एवं अन्य में अधिनियम के प्रावधानों एवं बिना अनुज्ञप्ति प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसी को तत्संबंधी व्यवसाय में संलग्न न किए जाने संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए समय-समय पर समाचार पत्रों में प्रेस विज्ञप्ति का भी प्रकाशन किया गया है।

(II) सुधारात्मक कदम (Remedial Measures) :-
(क) यदि सभी निरोधात्मक उपायों के बावजूद स्थानीय पुलिस पदाधिकारियों के संज्ञान में यह आता है कि खाप पंचायत आहूत की गई एवं उसके द्वारा कोई आदेश पारित किया गया है, जो अंतरजातीय/अंतर-धर्म युगल जोड़े अथवा उसके परिवार के विरुद्ध हैं, तो उस क्षेत्र के पुलिस पदाधिकारी अविलम्ब उचित धाराओं (भा0द0वि0 141, 143, 503 सहपठित 506 सहित) में प्राथमिकी दर्ज कराएँगे।
ख) प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना अविलम्ब पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक को दी जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कांड का प्रभावी अनुसंधान किया जाए एवं इसे तत्परतापूर्वक तार्किक परिणति तक ले जाया जाए।
(ग) साथ ही संबंधित युगल जोड़े एवं उनके परिवार की सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता होने पर उन्हें जिले के अंदर अथवा बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा। राज्य सरकार समुचित संख्या में ऐसे सुरक्षित भवन (Safe House) स्थापित करने का प्रयास करेगी जो 1. अविवाहित युगल जोड़े एवं 2 नव विवाहित युगल जोड़े जो खाप पंचायत के लक्ष्य पर हैं, को आवासित कर सके। ऐसे सुरक्षित भवन (Safe House ) को जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में रखा जाएगा।
(घ) जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक प्रभावित युगल जोड़े/परिवार की सुरक्षा के विषय पर अत्यन्त संवेदनशीलता से निर्णय करेंगे। यह सुनिश्चित करने के बाद कि दोनों कानूनन वयस्क हैं, दोनों के विवाह हेतु आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। मामूली भुगतान के आधार पर दोनों को राज्य सरकार के सुरक्षित भवन में अधिकतम एक वर्ष के लिए आवासित किया जा सकता है।
(च) किसी भी युगल जोड़े अथवा स्वतंत्र माध्यम से यदि यह सूचना प्राप्त होती है कि उनके परिवार/स्थानीय समुदाय/खाप के लोग उनके संबंध/विवाह के विरुद्ध हैं, तो इस मामले में जाँच अपर पुलिस अधीक्षक कोटि के पदाधिकारी को दी जाएगी। वह प्रारंभिक जाँच कर सुरक्षा-खतरे (Security Threat) का आकलन करेंगे एवं एक सप्ताह के अंदर अपना प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक को समर्पित करेंगे।
(छ) उपरोक्त प्रतिवेदन के प्राप्त होने पर पुलिस अधीक्षक द्वारा संबंधित पुलिस उपाधीक्षक को प्राथमिकी दर्ज करने का निदेश दिया जाएगा। पुलिस उपाधीक्षक स्वयं इस कांड के अनुसंधान का पर्यवेक्षण करेंगे तथा यह सुनिश्चित करेंगे कि इसे तत्परतापूर्वक एवं पूर्णता से निष्पादित किया जाए। अनुसंधान के दौरान सभी संबद्ध व्यक्तियों, बिना किसी अपवाद, के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। यदि खाप पंचायतों के सदस्यों की भूमिका साजिश अथवा उत्प्रेरण में प्रकट होती है तो उन्हें इसके लिए भी आरोपित किया जाएगा।

(III) दंडात्मक कदम (Punitive Measures) :-

(क) यदि किसी भी पुलिस पदाधिकारी अथवा जिला प्रशासन के पदाधिकारी द्वारा ऊपर अंकित निदेशों का अनुपालन नहीं किया जाता है तो माना जाएगा कि यह जान बुझकर बरती गई कोताही है, जिसके लिए सेवा नियमों के अधीन विभागीय कार्रवाई की जाएगी। 6 माह के अंदर इस विभागीय कार्रवाई को तार्किक परिणती तक ले जाया जाएगा।

(ख) पदाधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई उन परिस्थितियों में भी की जाएगी जब :-
(i) कोई पदाधिकारी सूचना रहने के बावजूद किसी घटना को रोकने में विफल रहे।
(ii) घटना होने के उपरान्त दोषी व्यक्तियों को गिरफ्तार करने एवं उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने में कोताही बरती गई ।

(ग) प्रत्येक जिले में एक विशेष कोषांग होगा, जिसमें
(i) पुलिस अधीक्षक,
(ii) जिला कल्याण पदाधिकारी एवं
(iii) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से आनेवाले राजपत्रित पदाधिकारी रहेंगे, जो अंतरजातीय विवाह/संबंधों के पीड़ित व्यक्तियों से आवेदन प्राप्त कर इसपर कार्रवाई करेगी।

(घ) इन विशेष ईकाइयों के लिए 24 घंटे कार्य करने वाला एक Helpline कार्य करेगा, जो प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक सहयोग एवं सुरक्षा प्रदान करेगा।

(च) Honour Killing एवं युगल जोड़ों के विरुद्ध हिंसा के मामलों का विचारण Designated Court/Fast Track Court द्वारा किया जाएगा। विचारण दिन-प्रतिदिन चलेगा एवं यथा संभव 6 माह के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। यह निदेश पूर्व के लंबित कांडों के संबंध में भी लागू होगा।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वीरता का परिचय देने वाले सात जवानों को प्रत्येक वर्ष 51-51 हजार रूपये का पुरस्कार

स्वतंत्रता आन्दोलन में शहीद हुए राष्ट्रभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह घोषणा की गयी थी की प्रतिवर्ष स्वाधीनता दिवस के अवसर पर वीरता का परिचय देनें वाले सात जवानों को 51-51 हजार रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा |

पुरस्कार पाने की पात्रता के लिए अपने सामान्य कर्त्तव्य निर्वहन के दौरान या संधारित अभियान के संचालन के क्रम में अपराधियों/ असामाजिक तत्वों आदि से खतरनाक परिस्थिति में मुठभेड़ करते हैं, जहां आग्नेयास्त्रों से दोनों तरफ से फायरिंग या बम प्रहार की घटना घटित हो, या किसी अन्य तरह से उग्रवादियों/ अपराधियों/ असामाजिक तत्वों द्वारा जान को खतरा उत्पन्न किया गया हो एवं शारीरिक रूप से अपंग होने की संभावना हो,पुलिस कर्मी/ जवान जो जोखिम उठाकर एवं साहस के साथ सभी प्रतिकूल परिस्थितियों के विपरीत अपने कर्त्तव्य पर खरे उतरे हों अथवा उग्रवादियों/ अपराधियों के द्वारा मुठभेड़ के दौरान भारी गोला-बारी किये जाने के दौरान प्रतिरोध दर्शाने एवं उसे निष्क्रिय करने हेतु आदमी उत्साह एवं कार्य दक्षता प्रदर्शित किये हों, अथवा वैसे पुलिस कर्मियों/ जवानों जिन्हें वीरता पदक से अलंकृत करनें का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया, परन्तु विलम्ब से अनुशंसा भेजने अथवा अनुशंसित करने वाले सक्षम पदाधिकारियों के द्वारा की गयी प्रक्रियायों में त्रुटि के कारण यदि इसे भारत सरकार द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाएगा |

प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वीरता का परिचय देनें वाले सात सुयोग्य पुलिस जवानों /कर्मियों का चयन करनें हेतु, चयन समिति का गठन निम्न रूप से किया गया है :-

I) पुलिस महानिरीक्षक (अभियान), बिहार, पटना : अध्यक्ष
II)पुलिस महानिरीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना : सदस्य
III)पुलिस उप-महानिरीक्षक (कार्मिक), बिहार, पटना : सदस्य
IV)पुलिस महानिरीक्षक के सहायक (क्यू०), बिहार, पटना : सदस्य

बिहार में गृह रक्षा वाहिनी के गृहरक्षकों के संवर्ग प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना

गृह रक्षा वाहिनी स्वयंसेवी संगठन है। इसका उद्देश्य विधि-व्यवस्था संधारण में पुलिस को सहायता करना, विशेष स्थिति में कार्य करना, अपातकालीन स्थिति में आवश्यक सेवाओं का बनाए रखना एवं आपदा प्रबंधन का कार्य करना है। विगत वर्षों में बिहार गृह रक्षा वाहिनी की भूमिका में काफी विस्तार हुआ है । गृह रक्षकों की कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति उनके दैनिक भत्ते एवं कल्याणकारी सुविधाओं में वृद्धि हुई है। समाज के लिए गृहरक्षकों की भूमिका एवं योगदान और महत्त्वपूर्ण हो गया है।

बिहार गृह रक्षा वाहिनी में नियमित कर्मियों की काफी कमी है। गृह रक्षा वाहिनी कार्यालयों में गृहरक्षकों से संबंधित अभिलेखों की उपलब्धता एवं संधारण संतोषजनक नहीं है। गृहरक्षकों की कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति एवं भुगतान में अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं अपारदर्शिता की शिकायत मिलती है। अभिलेखों का संधारण संतोषजनक नहीं होने एवं पारदर्शिता के अभाव के कारण इस पर नियंत्रण करना कठिन भी होता है।

गृह रक्षा वाहिनी संगठन में गृहरक्षकों से संबंधित अभिलेखों का संधारण सुनिश्चित करने, उनकी प्रतिनियुक्ति एवं भत्ता भुगतान में भ्रष्टाचार को रोकने, उसमें अनियमितता एवं मनमानी को समाप्त करने तथा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने के लिए गृह विभाग, बिहार सरकार द्वारा गृहरक्षकों के संवर्ग, प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूट्रीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना को लागू किया गया है। इसके अन्तर्गत गृह रक्षा वाहिनी के सभी जिला कार्यालयों में गृहरक्षकों से संबंधित सभी अभिलेख, उनकी प्रतिनियुक्ति तथा उनके मानदेय भुगतान को कम्प्यूट्रीकृत करने एवं सभी जिला कार्यालयों को आपस में तथा राज्य मुख्यालय से कम्प्यूटर नेटवर्किग से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। मुख्यालय, पटना में इसका राज्य स्तरीय केन्द्र (सेन्टर) है, जहां से इसकी मानिटिंग का प्रावधान है। इसके अन्तर्गत सभी जिलों के पुनर्नमांकित वैध गृहरक्षकों का डाटावेस बनाने के लिए उनसे संबंधित सारी अभिलेखीयें जानकारी को कम्प्यूट्रीकृत किया गया है। कुल 33 (तैतीस) कॉलम में प्रविष्टि का प्रावधान है। राज्य के पुनर्नमांकित 52239 गृहरक्षकों में से 51114 (लगभग 98 प्रतिशत) प्रविष्टि होने का रिपोर्ट है।

जो गृहरक्षक कहीं कर्तव्य पर प्रतिनियुक्त नहीं होंगे और नियमित कर्तव्य पर प्रतिनियुक्त होना चाहेंगे, पहले वे माह के प्रथम सोमवार को अपने जिला होमगार्ड कार्यालय जाकर रोस्टर पंजी में नाम अंकित कराते थे। इसी की सूची के आधार पर उन्हें कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति किए जाने का प्रावधान था। अब ऐसे गृहरक्षकों को रोस्टर में नाम लिखाने के लिए कार्यालय पर नहीं आना पड़ेगा। अब वे नियमित कर्त्तव्य हेतु अपने रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर से एक नंबर (01122901702) पर मिसकॉल करते है। इसी के आधार पर रोस्टर पंजी में उनका नाम अंकित हो जाता है तथा इसकी सूचना उन्हें उनके मोबाईल नंबर पर हिन्दी में मैसेज के माध्यम से चली जाती है। जब रिक्त स्थान पर या निर्धारित समय से अधिक से प्रतिनियुक्त या अन्य कारणों से बदले जाने वाले गृहरक्षकों से संबंधित प्रविष्टि कम्प्यूटर में की जाती है तब रोस्टर में मोबाईल के माध्यम से अपना नाम रजिस्टर्ड कराए (वर्तमान में इसके साथ आपवादिक स्थिति के लिए कम्प्यूटर से मैनूअल से ऑनलाईन भी नाम दर्ज कराने की व्यवस्था चल रही है) गृहरक्षकों की सूची में रैण्डमाइज सिस्टम से कमान पत्र निर्गत हो जाता है तथा उन गृहरक्षकों को उनके मोबाईल पर हिन्दी मैसेज से इसकी सूचना मिल जाती है। गृहरक्षक कमान को प्राप्त कर प्रतिनियुक्ति स्थान पर रिर्पोट करते है। ऐसे ही भत्ते की राशि गृहरक्षक के खाते में जाते ही उसके मोबाईल पर हिन्दी में मैसेज प्राप्त हो जाता है तथा गृहरक्षक को इसकी जानकारी लेने कार्यालय या बैंक का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। इसी प्रकार गृहरक्षक को कर्तव्य से विरमित होने, किसी प्रकार की सजा दिए जाने, उससे विमुक्ति, साठ वर्ष की उम्र सीमा पूर्ण होने पर सेवामुक्त होने की सूचना भी संबंधित गृहरक्षक को उनके मोबाईल पर हिन्दी में मैसेज द्वारा मिलने का प्रावधान है।

गृहरक्षकों की दो श्रेणी का प्रावधान है। पहली श्रेणी में सामान्य गृहरक्षक होते है जो सामान्य ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त होते है। दूसरी श्रेणी में विशिष्ट योग्यता वाले यथा चालक, टाइपिस्ट, कम्प्यूटर ऑपरेटर, नाई, धोबी, कूक, आवासीय परिसर में कार्य करने में निपुण आदि के गृहरक्षक होते है। गृहरक्षक अपने ही कोटि के गृहरक्षक से बदले जाते है। विशेष विधि-व्यवस्था कर्तव्य पर इसी प्रक्रिया से प्रतिनियुक्ति होती है। इसके तहत रजिस्ट्रेशन कराये गृहरक्षकों की संख्या यदि विशेष विधि-व्यवस्था कर्तव्य के लिए स्वीकृत संख्या के बराबर या उससे कम होगी तो रजिस्ट्रेशन कराने वाले सभी गृहरक्षकों को विशेष ड्यूटी के लिए आगमन हेतु उनके मोबाईल पर मैसेज देकर कॉलअप किया जाता है। यदि स्वीकृत संख्या रजिस्ट्रेशन कराये गृहरक्षकों से कम होती है तो रैण्डमाइज तरीके से गृहरक्षकों को मैसेज देकर कॉलअप किया जाता है। यदि उस विशेष कर्तव्य के लिए कॉलअप किये गृहरक्षकों से कम संख्या में गृहरक्षक आगमन कराते है तो सेमी पोस्ट से गार्ड कमांडर को मैसेज देकर या रजिस्ट्रेशन सूची के दूसरे गृहरक्षकों को मैसेज देकर कॉलअप किए जाने का प्रावधान है।

गृह रक्षा वाहिनी के गृहरक्षकों के संवर्ग, प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूट्रीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना का परियोजना प्रस्ताव NIC, बिहार स्टेट सेंटर, पटना द्वारा तैयार किया गया है। इसके प्रथम वर्ष के लिए सरकार द्वारा रूपया 14305526=00 (एक करोड़ तैतालीस लाख पाच हजार पाँच सौ छब्बीस) मात्र की स्वीकृति है।

ई-कमान योजना को तीन एजेंसियों के माध्यम से लागू किया गया हैं। बेल्ट्रॉन को सभी जिला होमगार्ड कार्यालय को 01-01 की दर से कुल 40 एवं राज्य मुख्यालय गृह रक्षा वाहिनी पटना को 02 कुल 42 कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर, यू.पी.एस. आदि प्राप्त कराना था। बेल्ट्रॉन में सभी स्थानों पर कम्प्यूटर सामग्री प्राप्त करा दी है। इस पर कार्यपालक सहायक द्वारा कम से कम पांच गृहरक्षकों/कर्मियों को संचालन का प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। इसमें वैसे कर्मी एवं गृहरक्षक को प्राथमिकता दी जाती है। जिनकी सेवा निवृति या सेवामुक्ति में कम से कम 05 वर्ष हो, जो कम से कम मैट्रिक पास हो और कम्प्यूटर कार्य के इच्छुक हो या पूर्व से जानकार हो।

बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाईटी (B.P.S.M) के माध्यम से सभी जिला होमगार्ड कार्यालय एवं मुख्यालय को B.P.S.M के जिला स्तरीये पैनल से जिला पदाधिकारी को आवंटित संख्या में कुल 42 कार्यपालक सहायक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ये कार्यपालक सहायक अपना कम्प्यूटर सेट एवं सिस्टम लेकर आयेंगें। इनके 1 वर्ष (12 माह) के मानदेय की राशि सभी जिला को जिला ई-गवर्नेस सोसाईटी या जिला पदाधिकारी को उनके खाता के माध्यम से प्राप्त करा दी गई है। अभी नवादा एवं सीतामढ़ी को छोड़कर शेष सभी जिलों में कार्यपालक सहायक कार्य कर रहे हैं।

एन.आई.सी. द्वारा इससे संबंधित मुख्य सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा हैं। सॉफ्टवेयर निर्माण के अन्तर्गत गृहरक्षकों का डाटा बेस बनाने, नियमित कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति, विशेष एवं आपातकालीन कर्तव्य पर प्रतिनियुक्ति, दूसरे जिला में प्रतिनियुक्ति आदि पर कार्य लगभग पूर्ण है। लेखा से संबंधित मांग पत्र, रसीद, भुगतान आदेश, भुगतान रॉल एवं विपत्र बनाने तथा लेखा संबंधित विवरणी बनाने पर कार्य किया गया है। वैशाली जिले में यह सफलता पूर्वक चल भी रहा है। दूसरे जिलाओ में इसे प्रारंभ कराया जा रहा है।

ई-कमान योजना को बिहार स्टेट डाटा सेंटर को क्लाउड सर्वर पर वेवसाइट होस्टिंग किया गया है। इसकी सुरक्षा ऑडिट के लिए राशि बेल्ट्रान को प्राप्त करा दी गई है।

परियोजना प्रस्ताव के आलोक में ई-कमान योजना के दूसरे वर्ष की स्वीकृति सरकार से प्राप्त है। दूसरे वर्ष के लिए रू. 7686552=00 (छिहतर लाख छियासी हजार पाँच सौ बावन) मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति हैं। इसके अन्तर्गत 42 कार्यपालक सहायको के 12 माह की मानदेय की राशि तथा सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए NICSI, नई दिल्ली को दी जाने वाली राशि है।

वर्तमान के राज्य में सभी जिले में इस परियोजना के तहत रास्टर में नाम प्रविष्टि एवं सभी प्रकार की प्रतिनियुक्ति का कार्य चल रहा है। लेखा से संबंधित कार्य भी वैशाली जिला में चल रहा है तथा गया, सिवान एवं नालंदा जिलों में शुरू किया गया है। शेष जिलो में भी शीघ्र शुरू करने का निदेश है। गृहरक्षकों को कर्तव्य हेतु रास्टर में नाम रजिस्ट्रेशन होने, प्रतिनियुक्ति, विरमित होने, निलंबित होने, उससे मुक्त होने, सेवा मुक्त होने और भत्ते की राशि एवं अन्य राशि के भुगतान से संबंधित जानकारी SMS के माध्यम से उनके रस्टिर्ड मोबाईल नम्बर पर दी जाती है। इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत सॉफ्टवेयर के प्रावधान के प्रशिक्षण के लिए, समस्या के समाधान तथा प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित अन्तराल पर विडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की जाती है जिसमें जिला समादेष्टा, अन्य पदाधिकारी, एवं कार्यपालक सहायक शामिल होते है।

बिहार में गृह रक्षा वाहिनी के गृहरक्षकों के संवर्ग, प्रबंधन एवं मानदेय भुगतान की कम्प्यूट्रीकृत व्यवस्था की ई-कमान योजना हमारी वर्तमान सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। बिहार में समाज के सबसे निचले तबके की बहुलता वाले इस स्वयंसेवी संगठन के कार्यों के संचालन में यह पारदर्शिता, ईमानदारी, तकनीक एवं आधुनिकता के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है।